कोलकाता 16 जुलाई 2026 – विधानसभा चुनाव रिजल्ट (4 मई 2026) के बाद से पश्चिम बंगाल की राजनीति में रोज झटके लग रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी के लिए एक और राजनीतिक झटका तब लगा, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने बुधवार को ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल होने का फ़ैसला किया। इससे 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद पार्टी के भीतर संकट और गहरा गया है। उत्तर 24 परगना के कमारहाटी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले मित्रा ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस एक “बंटी हुई” पार्टी बन गई है।
पश्चिम बंगाल में सियासी हलचल तेज है और टीएमसी में फूट मची है। कई विधायक ममता बनर्जी के साथ छोड़ चुके हैं। कई राज्यसभा और लोकसभा सांसद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भतीजे अभिषेक बनर्जी से नाराज चल रहे हैं। इस बीच बीजेपी सरकार ने उद्योगपतियों के लिए दरवाजे खोल रही हैं। VFS Capital के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी कुलदीप मैती ने अपनी नई राजनीतिक यात्रा की शुरुआत से पहले माँ विन्ध्यवासिनी धाम, विन्ध्याचल में दर्शन-पूजन किया। उन्होंने प्रदेश की सुख-शांति और जनसेवा के लिए माँ से आशीर्वाद मांगा।
दर्शन के बाद मैती ने कहा, “सेवा ही संकल्प है। माँ के आशीर्वाद से अब मैं कोलकाता और पश्चिम बंगाल के विकास में प्रत्यक्ष भूमिका निभाना चाहता हूँ।” सूत्रों के अनुसार वे जल्द ही भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम कर राज्यसभा जा सकते हैं। सदस्यता ग्रहण समारोह किसी वरिष्ठ नेता, संभवतः बीजेपी अध्यक्ष या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हो सकता है।
सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कुलदीप मैती को पूर्वी भारत के माइक्रोफाइनेंस सेक्टर का जाना-माना नाम माना जाता है। पिछले दो दशकों से वे महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के वित्तीय सशक्तिकरण के लिए काम कर रहे हैं। मंदिर में बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित थे। आशीर्वाद लेकर लौटने पर दर्शकों में उत्साह देखा गया।
टीएमसी से मोहभंग के बाद भाजपा में नए चेहरों के जुड़ने की चर्चा के बीच मैती का नाम भी तेजी से सामने आ रहा है। मैती बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन और सोशल सेक्टर में दो मास्टर डिग्री के साथ डॉक्टरेट भी हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और युवा रोजगार को लेकर वे जल्द अपनी कार्ययोजना की घोषणा करेंगे। भाजपा और मैती की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कुछ दिन पहले ही चंद्रिमा भट्टाचार्य ने तृणमूल कांग्रेस की पश्चिम बंगाल अध्यक्ष पद से इस्तीफ़ा दे दिया था। जिससे पार्टी के भीतर बढ़ती बेचैनी को लेकर अटकलें तेज़ हो गई थीं। घटनाओं ने 2011 के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल में सत्ता गंवाने के बाद पार्टी की एकजुटता बनाए रखने की क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मदन मित्रा का राजनीतिक बैकग्राउंड तृणमूल के वरिष्ठ नेता मदन मित्रा उन 80 विधायकों में शामिल थे, जो 2021 में पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए चुने गए थे। राज्य में BJP की ज़बरदस्त जीत के बावजूद उन्होंने कामरहाटी सीट पर अपनी जीत बरकरार रखी। BJP ने 294 विधानसभा सीटों में से 208 सीटें जीतीं। बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का लंबा शासन खत्म हो गया और पहली बार BJP की सरकार बनी।
